उत्तराखंड में गुरुवार को निकाय चुनाव होना है. इसके लिए बैलट पेपर के माध्यम से वोट डाले जाएंगे. राज्य चुनाव आयोग का दावा है कि चुनाव के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं. 1515 मतदान केंद्र और 3394 मतदेय स्थल बनाए गए हैं. इसके अलावा, चुनाव प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए 16,284 कार्मिकों और 25,800 सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है.
बैलट पेपर से चुनाव करने को लेकर राज्य चुनाव आयुक्त की मंशा है कि निकाय चुनावों में 4 तरह की मशीनों की रूरत पड़ती है और कई मशीन लगने के कारण खर्चा भी काफी बढ़ जाता है. राज्य चुनाव आयुक्त सुशील कुमार ने निर्देश दिए हैं मतदान संपन्न होने तक आचार संहिता का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए.
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा करते हुए निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से कराने के निर्देश दिए. आयुक्त ने बताया, सभी जिलों में बैलेट पेपर पहुंच गए हैं.
बता दें कि उत्तराखंड में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया 27 दिसंबर को नामांकन पत्र दाखिल करने के साथ शुरू हुई थी. इन चुनावों में 11 नगर निगम, 43 नगर पालिका परिषद और 46 नगर पंचायतों के लिए मेयर के 72, अध्यक्ष के 445 और पार्षद एवं सदस्य के 4888 प्रत्याशी मैदान में हैं. 3 जनवरी को चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद राज्य में प्रचार अभियान तेज हो गया था, जो 18 दिन तक चला और मंगलवार शाम पांच बजे समाप्त हो गया.
निकाय चुनाव की बात करें तो इस बार बड़ी पार्टियों के साथ साथ निर्दलीय प्रत्यशियों ने भी जोर शोर से स्थानीय मुद्दों पर अपना चुनावी अभियान चलाया. इन निकाय चुनावों में कुल 30.29 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराई जाए.
पिछले चुनावों की बात करें तो 2018 में हुए नगर निकाय चुनाव में मेयर और अध्यक्ष की 84 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने 34-34 सीटों पर जीत दर्ज की थी. वहीं, 23 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी, जबकि एक सीट बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई थी. हालांकि, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी को इन चुनावों में सफलता नहीं मिली थी. क्षेत्रीय पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) का भी प्रदर्शन निराशाजनक रहा था.
2013 में हुए नगर निकाय चुनाव में 5 अप्रैल को मतदान हुआ था और 30 अप्रैल को परिणाम घोषित किए गए थे. कुल 69 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस ने 20 सीटों पर कब्जा किया था. बहुजन समाज पार्टी ने 3 सीटें जीती थीं और समाजवादी पार्टी को 1 सीट मिली थी. उत्तराखंड क्रांति दल ने भी 1 सीट पर जीत हासिल की थी. वहीं, 22 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जनता का भरोसा जीतने में सफलता पाई थी.